दूरदर्शन और वो सुनहरे दिन
मई 21, 2006
कुछ दिन पहले एक फॉरवर्ड आ गया, उसमे था दूरदर्शन का वो पुराना वीडीओ “एक अनेक और एकता” और उसे देखने के बाद पुरानी यादे ताज़ा हो गई। फिर हमें सनक लग गई पुराने वीडीओ और गाने इकट्ठे करने की। पिछ्ले दस दिन मे जो भी इंटरनेट से बटोरा है वह यहाँ पेश कर रह हु और उम्मीद है कि आप लोगों को पसंद आयेगा।
एक अनेक और एकता – वीडीओ: Play Now | Play in Popup | Download
एक अनेक और एकता – ऑडीओ [7:05m]: Play Now | Play in Popup | Download
जंगल बुक – ऑडीओ [1:28m]: Play Now | Play in Popup | Download
सुरभि – ऑडीओ (ये एल सुब्रमनियम की रचना मदरलैंड है) [6:49m]: Play Now | Play in Popup | Download
मिले सुर मेरा तुम्हारा – ऑडीओ [5:34m]: Play Now | Play in Popup | Download
बजे सरगम हर तरफ से – ऑडीओ [5:43m]: Play Now | Play in Popup | Download
भारत एक खोज – ऑडीओ [3:48m]: Play Now | Play in Popup | Download
डोंट स्प्रेड रुमर्स – वीडीओ: Play Now | Play in Popup | Download
माल्गुडी डेज़ – ऑडीओ [1:09m]: Play Now | Play in Popup | Downloadवैसे तो मिले सुर मेरा तुम्हारा का MIT वीडीओ भी था पर वो काफी बड़ा है और काफी जगह उपलब्ध है इसलिये इस सुची मे शामिल नहीं किया।

लोड कर रहा है...


“दूरदर्शन और वो सुनहरे दिन” के लिये 7 टिप्पणीयाँ
‘एक, अनेक और एकता’ देख कर बहुत अच्छा लगा। बचपन की यादें ताज़ा हो गईं। इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। लेकिन ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ की कड़ी काम नहीं कर रही है।
अच्छी बात है, वो हम कर देन्गे।
जी वो ram फाईल थी इसलिये मुश्किल आ रही थी। अब वो गलती सुधार दी है
“मिले सुर मेरा तुम्हारा” का original विडियो (MIT वाला नहीं) कई लोग खोज रहे हैं। वह उपलब्ध हो जाए तो क्या कहने! क्या कोई उसे दूरदर्शन से रिकॉर्ड कर सकते हैं?
बचपन में मैं दूरदर्शन के पट खुलने से शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम तक बुद्धू बक्से के सामने टिका रहने वाला जीव था. आपके इस उपहार ने तो उन दिनों की याद ताज़ा करा दी. विनोदजी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!
तब मै बहुत छोटा था बहुत टी0 वी0 नही हुआ करता था सौ घरो मे 4-5 ही हुआ करते थे। रामायण के बारे मे लोग सारे काम धाम छोड कर सभी टेलीविजन से चिपक जाते थे और महाभारत के बारे मे धारण थी कि इसे न देखो घर मे कलह होगी। यह सब कार्यक्रम पुरानी यादे ताजा कर दी है।
Thanx Vinod,
For sharing such a wonderful old remembrance,
This are not only advertisements, they are the songs of Integrity, Diversity of India.
Like our Anthem, they are couples with our souls.