कुछ यादे

आज से बहुत दिन पहले हमने पहली बार एक हिन्दी चिट्ठा देखा था तो हमें लगा कि हमे भी यह नेक काम कर ही देना चाहिये। हमने रमण कौल , जीतू जी और ई-स्वामी( आश्चर्य की बात है कि मैने इनका नाम भी नहीं पूछा !!) की मदद से एक हिन्दी चिट्ठा शुरु कर दिया लेकिन इत्तफाक से वो हमारे अभियांत्रिकी की डिग्री का आखरी सत्र था और हम अपने आखरी परीक्षा के नज़दीक थे तो इसे भूल ही गये। फिर पढ़ाई खतम होते ही नौकरी की तलाश शुरु कर दी और सफल भी रहे। 29 अगस्त 2005 को हमने इंफोसिस मे शुरुआत की। अब अचानक पिछले महिने याद आया की हमने कभी हिन्दी मे भी लिखना चाहा था और एक चिट्ठा भी शुरु किया था। लगे हाथ हमें squible सीधे सादे हुब्रिक से ज्यादा पसन्द आ गया तो हमने पहले उसका अनुवाद किया और आखिरकार हिन्दी चिट्ठा विश्व मे अपने कदम दोबारा रख ही दिये और आशा करते है पिछ्ली बार की तरह गायब नहीं होंगे।

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